वक्रतुण्‍ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।

निर्विघ्‍नम् कुरुमेदेव सर्वकार्येषु सर्वदा।।

ई-पत्रिका

अंक-1, वर्ष-1

ई-पत्रिका का पहला अंक प्रस्‍तुत है। आशा है आप सबको यह अंक पसंद आएगा। आपके सुझावों और संदेशों का स्‍वागत है।

-सुबोध कुमार
 

संरक्षक

श्री बी एस मीणा, सचिव

प्रमुख परामर्शदाता

 श्री अम्‍बुज शर्मा, संयुक्‍त सचिव

परामर्श  मंडल्र

श्री देवाशीष जैना, निदेशक
श्री एस के सिंह, उप सचिव
श्री एम आर बाली, अवर सचिव
संपादक
सुबोध कुमार, सहायक निदेशक
संपादन सहयोग
श्री लाल बाबू प्रसाद
श्री चांद वीर
कु सीमा सोनी

श्री बृजेश कुमार शर्मा

श्री धर्मेन्‍द्र सिंह

 

 

 

 

 

 

भारी उद्योग विभाग

उद्योग भवन, नई दिल्‍ली

हम सब हिन्‍दी में काम करने का संकल्‍प लें

   कम से कम-

  • अपने हस्‍ताक्षर हिन्‍दी में करें।

  • सभी प्रकार के छुट्टी के आवेदन पत्र हिन्‍दी में ही भरें।

  • हिन्‍दी में प्राप्‍त पत्रों के उत्‍तर हिन्‍दी में ही दें।

  • द्विभाषी फार्म केवल हिन्‍दी में ही भरें।

  • मेडिकल बिल, एल0टी0सी0 अग्रिम तथा बिल हिन्‍दी में प्रस्‍तुत करें।

  • सरकारी दौरा कार्यक्रम हिन्‍दी में ही प्रस्‍तुत करें।

  • कार्यालय आदेश/परिपत्र द्विभाषी रूप में जारी करवाएं।

  • सभी रजिस्‍टरों में प्रविष्टियां हिन्‍दी में ही करें।

  • अग्रेषण पत्र (फारवर्डिंग लेटर) तथा अनुस्‍मारक (रिमाइंडर) यथासंभव हिन्‍दी में ही भेजें।

  • हिन्‍दी भाषी राज्‍यों में स्थित केन्‍द्रीय/राज्‍य सरकारों के कार्यालयों को पत्र केवल हिन्‍दी में ही भेजें।

  • फाइलों पर दो-दो, तीन-तीन शब्‍दों की टिप्‍पणियां/आदेश जैसे बात कीजिए, प्रस्‍तुत कीजिए, समीक्षा कीजिए, अनुमोदन के लिए प्र‍स्‍तुत, सूचना के लिए प्रस्‍तुत आदि हिन्‍दी में ही लिखें।

  • हिन्‍दी प्रशिक्षण/कार्यशालाओं की जानकारी प्राप्‍त करें।

  • हिन्‍दी लिखते समय यदि अंग्रेजी शब्‍दों की हिन्‍दी तत्‍काल याद न आए तो अंग्रेजी शब्‍द का देवनागरी लिपि में ही लिप्‍यंतरण कर लें।

  • हिन्‍दी में उपलब्‍ध सहायक साहित्‍य तथा सुविधाओं का लाभ उठाएं।

  • हिन्‍दी के कार्यक्रमों में भाग लें।

   ।।घर का काम मातृभाषा में, कार्यालय का काम राजभाषा में।।

 प्रस्‍तुति- राजभाषा अनुभाग


 

 

 

चाह के लिए राह बनाइए

 

    जीवन का निर्माण तीन शक्तियों  अथवा वृत्तियों से होता है - इच्‍छा (चाह), विचार और क्रिया। हमारे मन में किसी कार्य को संपन्‍न करने की, किसी वस्‍तु को प्राप्‍त करने की अथवा किसी लक्ष्‍य को प्राप्‍त करने की इच्‍छा अथवा चाह  उत्‍पन्‍न होती है। विचारशक्ति द्वारा हम अपने लक्ष्‍य अथवा प्राप्‍तव्‍य को प्राप्‍त करने की योजना बनाते हैं और अपनी क्रिया शक्ति द्वारा उस योजना को कार्यान्वित करने का प्रयत्‍न हैं।   इस त्रिविधि  प्रक्रिया द्वारा विश्‍व के समस्‍त  कार्यकलाप  संचालित होते ऱ्हते हैं, समस्‍त कार्यकलापों एवं गतिविधियों के मूल में प्रेरक शक्ति के रूप में हमारी  इच्‍छाशक्ति ही रहती है।

 

 

 

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है,

नाव जर्जर ही सही लहरों से टकराती तो है,

एक चिनगारी कहीं  से  ढूंढ  लाओ दोस्‍तो,

इस दिए में तेल से भीगी हुई बाती तो  है।

-दुष्‍यंत कुमार

 

 

धन्यवाद!