आटोमोबाइल और सम्बद्ध उद्योग (डीसीएए) के 29 जून, 2005 को नई दिल्ली में हुए अधिवेशन का विवरण
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आटोमोबाइल और सम्बद्ध उद्योगों के लिये विकास परिषद (डीसीएएआई) का अधिवेशन 29 जून 2005 को नई दिल्ली में सचिव,भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय की अध्यक्षता में हुई ।
2. विवरण की एक सूची संलग्न है । सदस्यों ,श्री आनंद महिन्द्रा और श्री कपिल देव, ने अनुपस्थिति अवकाश हेतु निवेदन किया था जो स्वीकार कर लिया था ।
3. श्री ए. दीदार सिंह, संयुक्त सचिव,भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालयऔर परिषद के सदस्य सचिव ने पुनर्गठित विकास परिषद के सदस्यों का स्वागत किया और अधिवेशन में अधिकांश सदस्यों की उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की । डीसीएएआई के पिछले अधिवेशन के विवरण पर की गई कार्यवाही पर सदस्यों से टिप्पणी करते हुए , उन्होंने आशा की कि ,भारी कार्य सूची के बावजूद, विचार विमर्श मुददों तथा आगामी चुनौतियों पर परिषद के प्रयासों पर ध्यान केन्द्रित करने में सहायक होगा । उन्होंने सदस्यों से प्रस्तुतिकरण के दौरान संक्षिप्त रहने का निवेदन किया ताकि कार्यसूची विषयों पर सभी सदस्यों के दृष्टिकोण प्राप्त करने पर पर्याप्त समय दिया जा सके । इसके उपरांत, सदस्य सचिव ने अध्यक्ष से परिषद को संबोधित करने की प्रार्थना की ।
4. सभी सदस्यों का हार्दिक स्वागत करते हुए, अध्यक्ष ने कहा कि ऐसे समय में जबकि आटोमोटिव उद्योग अपने इतिहास में निर्धारित करने वाली अवस्था से गुजर रहा है ,इस परिषद की अध्यक्षता उनका सौभाग्य था । उन्होंने सदस्यों को जानकारी दी कि य़द्यपि विविध अपरिहार्य कारणों से परिषद का एक लंबे समय से अधिवेशन नहीं हो सका, परन्तु विभाग समय समय पर कई विषयों पर उद्योग के नेतृत्वकर्ताओं से नियमित सम्पर्क में था और कई अन्य मंचों पर लगातार विचार विमर्श करता था । यद्यपि, उन्होने परिषद के अधिवेशनों के नियमित समयांतराल पर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया और सदस्यों से आज के अधिवेशन में ही अगले अधिवेशन के आयोजन की तिथि के अंतिम निर्धारण की प्रार्थना की ।
4.1. पिछले कुछ वर्षों में भारतीय आटोमोटिव उद्योग की उच्च वृद्धिदर की सराहना करते हुए, अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि उद्योग ने घरेलू और निर्यात बाजार दोनों में अच्छा निष्पादन किया है । भारतीय आटोमोटिव उद्योग ने यात्री कार खण्ड में दस लाख की सीमा को पार कर लिया है और व्यावसायिक वाहनों, विशेष रूप से बहु एक्सल वाहनों में राजकोषीय नीति संवितरण तथा सडक संसाधनों में विशाल निवेश के लाभकारी प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हुए एक वृहद वृद्धि प्राप्त की है । भारतीय कलपुर्जा उद्योग घरेलू ओईएम की अनन्यता से मुक्त होकर विश्व भर में पहुंच रहा है । मुख्य चुनौतियां, यद्यपि, उन्होंने दर्शाया,घरेलू साथ ही साथ वैश्विक स्तर पर वृद्धि को बनाये रखना, वैश्विक उपस्थिति में विस्तार हेतु कठिन प्रयास और मेड इन इण्डिया ट्रेडमार्क को एक वास्तविकता बनाना हैं । अध्यक्ष ने सुझाया कि भारत को एक विशाल वैश्विक आटोमोटिव केन्द्र बनाने, जिसके लिए परिषद को रणनीति निर्माण तथा
कार्य योजना बनाने में सहायता करनी चाहिए, के लिए परिस्थितियां पूर्णत: अनुकूल हैं । 4.2. तूरीन, इटली, में आईडीईए में भारी उद्योग मंत्री के हाल के दौरे की ओर ध्यान खींचते हुए अध्यक्ष ने सदस्यों को बताया कि आईडीईए के अधिकारियों ने मंत्री जी को सूचित किया था कि हाल ही में उन्होंने शंघाई, चीन में, आटो डिजायन और विकास के लिए एक केन्द्र खोला है । अध्यक्ष ने परिषद को बताया कि भारत में आईटी कौशल, स्टाइलिंग और डिजायनिंग में प्रशिक्षित श्रम शक्ति के विशाल मात्रा से भारतीय आटोमोटिव उद्योग की वृद्धि हेतु अवसरों के क्षेत्र के रूप में विकसित हो सकेगा । चीन जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा हेतु समर्थ बनने के क्रम में, उन्होने आशा की कि भारतीय डिजायन संस्थान (एनआईडी) और एसआई एएम जैसे संस्थानों को आईडीईए या समान वैश्विक इकाईयों से ऐसी ही सुविधाएं भारत में सृजित करने हेतु रणनीति बनाने के लिए बातचीत प्रारंभ करनी चाहिए ।
4.3. वैश्विक बाजारों के बढते एकीकरण और द्विपक्षीय व बहुपक्षीय कार्यकलापों पर हलचलको संदर्भित करते हुए, अध्यक्ष ने महसूस किया कि बाजार हलचलों की उचित समझ विकसित करने की आवश्यकता है जिसके लिए कुद केन्द्रित अध्ययन किये जाने की आवश्यकता है । अध्यक्ष ने यह दृष्टिकोण भी व्यक्त किया कि वैश्विक बाजारों के बढते एकीकरण के साथ स्तरों के समन्वय हेतु एक समर्पित संगठनात्मक व्यवस्था द्वारा, अगर आवश्यक है, अधिक केन्द्रित ढंग से व्यवहार की भी आवश्यकता है । अध्यक्ष ने इशारा किया कि पर्यवेक्षक के रूप में डब्ल्यूपी-29 के सदस्य होने के कारण उद्योग ने सम्मिलित विषयों की एक अच्छी समझ विकसित की थी और डब्ल्यू पी-29 के तहत संधियों में से एक में सम्मिलित होने पर निर्णय का समय आ चुका था । अध्यक्ष ने परिषद से भारत में जेएएसआईसी जैसे निकाय के गठन के प्रस्तावपर सरकार पर अपनी व्यावहारिक सलाह देने का प्रस्ताव किया ।
4.4. आटो नीति के उन्नयन में सरकारी पहल की ओर संकेत करते हुए, अध्यक्ष ने सदस्यों को बताया कि आटो क्षेत्र पर करों का युक्तिकरण हो रहा है, अवसंरचना में वृहद निवेश हो रहा है और वह आशा करते है कि सरकार का भारत निर्माण प्रस्ताववृहद आटोमोटिव मांग के लिए पथ निर्माण करते हुए ग्रामीण संबद्धता को आगे गति प्रदान करेगा । नेशनल आटोमोटिव टेस्टिंग एण्ड आर एण्ड डी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट (एनएटीआरआईपी) के गठन हेतु सरकारी पहल के संदर्भ में, अध्यक्ष ने शा की कि यह प्रोजेक्ट अब से कुछ ही सप्ताओं के दौरान शुरू किया जाएगा । अध्यक्ष ने अपनी समाप्ति टिप्पणी में स्पष्ट और अच्दी तरह परिभाषित रणनीतियों पर विचार विमर्श करने और बनानेपर जोर दिया जो कि उद्योग तथा सरकार द्वारा संयुक्त रूप से भारतीय आटो उद्योग को एक वृहद वैश्विक खिलाडी बनाने हेतु अगले 5 से 10 वर्षो में कार्यान्वय किये जाने हेतु आवश्यक है । .
अध्यक्ष द्वारा आरंभिक टिप्पणियों के उपरांत, निम्न कार्यसूची मद बहस हेतु लिये गये
5. कार्यसूची मद सं.1:- विकास परिषद की 4.4.03 को हुए अंतिम अधिवेशन के विवरणों का पुष्टीकरण ।
अंतिम अधिवेशनके विवरणों की पुष्टि की गई ।
6. कार्यसूची मद सं.2:- डीसीएएआई के अतिम अधिवेशन से विभिन्न परीक्षण एजेन्सियों की परियोजनाओं पर उपकर समिति के स्वीकृत निर्णयों का संशोधन ।
डीसीएएआई ने उपकर समिति के निर्णयों को संशोधित किया ।
7. कार्यसूची मद सं.3:- आटोमोबाइल उद्योग, आटो कलपुर्जा उद्योग और ट्रैक्टर उद्योग से संबंधित वर्तमान तथ्य तथा विषय ।
7.1. श्री जगदीश खट्टर,अध्यक्ष, एसआईएएम ने अाटोमोबाइल उद्योग से संबंधित वर्तमान तथ्यों तथा विषयों पर एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया । पिछले कुछ वर्षो में आटोमोबाइल क्षेत्र के बहुत अच्छे निष्पादन के बारे में बहस करते हुए, उन्होने परिषद को बताया कि चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम दो माह के दौरान वाणिज्यिक वाहन वाहन खण्ड में नकारात्मक वृद्धि हुई है । प्रस्तुतिकरण में एसआईएएम ने भारतीय आटो क्षेत्र पर प्रभाव डालने वाले मुददों जैसे विश्व व्यापार संगठन में चालू नामा वार्ताएं, उपयोग किये गये वाहन व्यापार पर वार्ताएं, मुक्त व्यापार समझौते,, क्षेत्र के वरियता नियम, आटो तेल नीति, डब्ल्यू पी 29 में सहभागिता और राष्ट्रीय सडक परिवहन नीति का संक्षिप्त विवरण दिया और इण्डियन क्लिन एयर प्रोग्राम, भारत में वाहनों की प्रतिस्पर्धात्मकता और पुनर्चक्रीकरणपर अध्ययन हेतु निधिकरण की आवश्यकता पर जो र दिया । एसआईएएम की ओर से बोलते हुए, री राहुल बजाज ने विश्व व्यापार संगठन से संबंधित चिंताओं जिनका आटोमोटिव उद्योग पर प्रभाव पड सकता है, पर संक्षंप में प्रकाश डाला और इन विषयों पर जागृत द़ृष्टिकोण की, यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारतीय उद्योग के पास स्तरीय उत्पादन क्षेत्र उपलब्ध है, आवश्यकता पर बल दिया ।
7.2. श्री दीप कथूरिया, अध्यक्ष, एसीएमए ने परिषद को अपने प्रस्तुतिकरण में पिछले कुछ वर्षों में आटो कलपुर्जा क्षेत्र के उत्कृष्ट निष्पादन के बारे में बताया । उन्होंने आशा प्रकट की कि 2015 में सकल उद्योग आकार 40 अरब अमेरिकन डालर के लगभग होगा जिसमें से घरेलू बाजार का आकार 20 अरब डालर के लगभग होगा और निर्यात/ वैश्विक आउटसोर्सिंग का 20 अरब अमेरिकन डालर के बराबर होगा । आटो कंपोनेंट उद्योग को सन-राइज निर्यात क्षेत्र में परिवर्तित करने के लिए उन्होंने आटो कलपुर्जा क्षेत्र को उचित प्ररणा दिये जाने और टेक्सटाइल उद्योग के अनुसार आटोमोटिव उद्योग आधुनिकीकरण निधि के गठन की आवश्यकता पर बल दिया । उन्होंने अपने प्रस्तुतिकरण में मुक्त व्यापार संघ/ वरियता व्यापार संघ,विपरीत कर संरचना और पुन: तैयार किये गये वाहनों के आयात पर भी चर्चा की ।
7.3. टीएमए के प्रतिनिधि श्री टी.सी.गोपालन ने टैक्टर उद्योग की ओर से ट्रैक्टर उद्योग के निष्पादन पर बहस के अलावा अन्य वाहन खण्डों के संबंध में ट्रैक्टर उद्योग के लिए वित्त प्रबंध के विवेकीकरणकी आवश्यकता पर बल दिया । एनएटीआरआईपी के गठन परसरकारी पहल का समर्थन करते हुए ,उन्होंने बूंदी में केन्द्रीय कृषि मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान पर उपलब्ध सुविधाओं के सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया ।
8. एक खुली बहस के उपरांत निम्न तीन प्रस्तुतिकरण हुये ।
8.1. चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम दो माहों में उत्पादन में गिरावट के संदर्भ में, श्री रतन टाटा ने स्पष्ट किया कि इस अवधि के दौरान टाटा मोटर्स को आलोच्य पूर्तिकर्ताओं में से एक से कलपुर्जो की अल्प पूर्ति की समस्या थी । श्री टाटा ने कहा कि भारत स्तर-II मानकों से भारत स्तर -III मानकों में परिवर्तन, कुछ भागों में नयी विशेषता के डीजल की अनुपलब्धता और कुछ राज्यों में 1 अप्रैल से वैट प्रणाली के परिवर्तन से जुडी समस्याओं ने भी चालू वित्तीय वर्ष के प्रथम दो माहों के दौरान आटो बिक्री में गिरावट में योगदान दिया ।
8.2. विश्व व्यापार संगठन के मुद्दों पर परिषद को संबोधित करते हुए, श्री राहुल बजाज ने संकेत किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था चीन की तुलना में कहीं अधिक खुली है । उन्होंने जोर दिया कि भारत में मूल्य वर्धन को प्रोत्साहन देने हेतु भारतीय उद्योग को एक स्तरीय उत्पादन क्षेत्र उपलब्ध कराया जाना चाहिए और सरकार को मुक्त व्यापार समझौतो और विश्व व्यापार संगठन वार्ताओं में प्रवेश के समय विकसित देशों के दबाव में नहीं झुकना चाहिए । और प्रयुक्त सीमा शुल्क दरों को वर्तमान स्तर से और अधिक नीचे नहीं लाना चाहिए । उन्होंने अध्यक्ष से निवेदन किया कि आटो क्षेत्र के लिए नोडल प्रशासनिक मंत्रालय होने के कारण भारी उद्योग विभाग को मुक्त व्यापार समझौतो और वरियता व्यापार समझौतो में प्रवेश के समय आटो क्षेत्र के पक्ष को मजबूती से रखना चाहिए और पुन: तैयार किये गये और पुनर्निर्मित वाहनों के आयात को अनुमति नहीं देनी चाहिए । उन्होंने यह भी कहा कि अव संरचना और उचित रूप से प्रशिक्षित व अनुशासित तकनीकी मानव श्रम की कमी आटो क्षेत्र की वृद्धि में बाधा डाल रही है ।
8.3. श्री सरित मोहन देव ने संकेत किया कि जहां कारों और आवास क्षेत्र हेतु ऋण सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हैं, वहीं बैंक ट्रैक्टर उद्योग के लिए इसी तरह की सुविधाएं देने में हिचक रहे हैं । श्री देव ने ट्रैक्टर खरीद हेतु तथा पंचायती निकायों द्वारा ट्रैक्टर बिक्री को उन्नत करने हेतु सामुदायिक प्रयोग के लिए खरीद के लिए वित्त सबसिडी की आवश्यकता पर बल दिया । श्री अभय फिरोदिया ने भी ट्रेक्टर क्षेत्र के लिए आसान वित्त सुनिश्चित करने के लिए नाबार्ड द्वारा पुनर्वित्त दरों में कमी की आवश्यकता पर बल दिया लेकिन वे अधिक प्रबंधन के पक्ष में नहीं थे जिसका परिणाम विकृति होता है । श्री बिजोन नाग इस मत के थे कि उद्योग को तकनीकी क्षमता को विशिष्टीकृत करने और सशक्त करने की आवश्यकता है और परीक्षण तथा आरएण्डडी अवसंरचना को मजबूत किये जाने की आवश्यकता है ।
8.4. आटो क्षेत्र की वृद्धि के लिए तथा भारत को एक वैश्विक आटोमोटिव केन्द्र के रूप में निर्मित करने हेतु सुझावों के लिए अध्यक्ष द्वारा पूंछे जाने पर , श्री रतन एन.टाटा ने संकेत किया कि उद्योग के सम्पूर्ण विकास के लिए अनुकूल ढ़ग से देखे जाने की आवश्यकता है । चीन और जापान द्वारा अपनायी गयी रणनीति की तुलना करते हुए श्री टाटा ने सूचित किया कि चीन और जापान दोनों ने आटो उद्योग को एक आकर्षक क्षेत्र के रूप में देखा और सभी सुविधाएं तथा समर्थन उपलब्ध कराया और इसी तरह के दृष्टिकोण की हमारे देश में भी आवश्यकता है । उन्होंने संकेत किया कि कलपुर्जा क्षेत्र में अधिकाधिक विकसित तकनीक आ रही है जिसे पहचानने और प्रोत्साहित किये जाने की आवश्यकता है । श्री टाटा का मत था कि उद्योग को भविष्य की चुनौतियों के सामने में समर्थ बनने तथा वैश्विक बाजार तक पहुंच हेतु तकनीक का क्रमिक उत्थान तथा समेकन वर्तमान समय की आवश्यकता है ।
8.5. अन्य सदस्यों के तमों का समर्थ करते हुए, श्री जगदीश खट्टर ने चीनी आटो नीति की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और सुझाव दिया कि भारतीय आटो नीति को भारतीय आटोमोटिव उद्योग की वर्तमान चुनौतियों के प्रति केन्द्रित और उत्तरदायी बनाने के लिए पुर्नदृष्टि की आवश्यकता है । श्री आशुतोषी तोयोशीमा ने चालकों के प्रशिक्षण, पैदल चलने वालों और स्कूली बच्चों को शिक्षण और देश में वाहनों के लिए बेहतर सुरक्षा मानको को अपनाने के लिए आश्वयकता व्यक्त की ।
8.6. श्री एम.पी.बेजबरूआ का मत था कि उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए मानवश्रम तथा तक्नीकी प्रशिक्षण सुधारों की आवश्यकता है । श्री आर.सी.जामथानी, योजना आयोग, ने स्पष्ट किया कि टेक्सटाइल उद्योग आधुनिकीकरण निधि चरण बद्ध रूप से दी जा रही है और सुझाव दिया कि आटो कलपुर्जा क्षेत्र के लिए इसी प्रकार की निधि के सृजन के लिय प्रयासों के बजाय इस समस्या के समाधान हेतु अन्य विकल्प अधिक उपयोगी होंगे । पर्यावरण और वन मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करते हुए श्रीमति संचिता जिंदल ने कहा कि यद्यपि भारतीय आटोमोबाइल उद्योग के विकास और उन्नयन हेतु आवश्यकता है, पर्यावरणीय विषयों पर भी समांतर रूप से ध्यान दिया जाना आवश्यक है कुछ सदस्यों ने बेहतर सुरक्षा हेतु शिक्षण और चालकों के बेहतर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर बल दिया ।
8.7. बहस समाप्त करते हुए,अध्यक्ष सदस्यों से सहमत थे कि सदस्यों द्वारा उठाने गये मुददों के सर्वग्राही रूप से विचार हेतु एक अनुकूल दृष्टिकोण लिये जाने की आवश्यकता है और सुझाव दिया कि एसआईएएम, एसीएमए और टीएमए के प्रतिनिधियों सहित एक कृतक बल संबंधित विषयों पर अधिक विस्तृत बहस हेतु तथा देश में आटो क्षेत्र के सतत विकास और उन्नयन को सुनिश्चित करने हेतु गठित किये जाने की आवश्यकता है ।
9. कार्यसूची मद सं.4: भारतीय आटोमोटिव क्षेत्र को एक वैश्विक केन्द्र के रूप में विकास हेतु 10 वर्षीय लक्ष्य योजना का निर्माण ।
आटो क्षेत्र को एक वैश्विक केन्द्र में विकसित करने हेतु सचिव समिति की सिफारिशों के बारे में बताया और विषयों पर संक्षिप्त बहस के बाद, यह निश्चय किया गया कि सचिव, एचआई एण्ड पीई की अध्यक्षता में एसआईएएम,एसीएमए और टीएमए के प्रतिनिधियों के साथ एक कृतक बल का गठन किया जाना चाहिए जो, अगर आवश्यक हो, अध्ययन और विषयों की पहचान के लिए जिनकी कि आगामी 10 वर्षो में आटो क्षेत्र के एक मुख्य वैश्विक केन्द्र के रूप में सम्पूर्ण विकास के लिए लक्ष्य योजना के निर्माण के लिए आवश्यकता होगी, सदस्य सहयोजित कर सके । कृतक बल सलाहकारों से एसआईएएम द्वारा प्राप्त प्रस्तावों पर भी निर्णय करेगा और पेशेवर अध्ययन करेगा अगर आवश्यक हो ।
10. कार्यसूची मद सं. 5: वाहनों की स्टाइलिंग और डिजायनिंग के क्षेत्र में क्षमता निर्माण
10.1. डा. डारली ओ.कोशी, कार्यकारी निदेशक, नेशनल इंस्टिट्यूट आफ डिजायन, अहमदाबाद ने संस्थान द्वारा चलाये जा रहे वर्तमान कार्यकलापों को दर्शाते हुए एक विस्तृत प्रस्तुतिकरण तथा सरकार की सहायता से आटोमोटिव डिजायन केन्द्रो के गठन का प्रस्ताव दिया ।
10.2. प्रस्तुतिकरण पर विचार विमर्श के दौरान, सदस्य सहमत हुये कि वाहनों की डिजायनिंग और स्टायलिंग एक अत्यंत महत्वपूर्ण और कठिन क्षेत्र है और आटोमोबाइल निर्माताओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए ऐसी सुविधाओं की स्थापना की आवश्यकता होगी । आटो निर्माताओं और एनआईडी के मध्य बढती पारस्परिक क्रिया और उद्योग द्वारा अपनी स्वयं की डिजायन और स्टायलिंग सुविधाओ के लिए आवश्यक मानवशक्ति के प्रशिक्षण की सुविधाओं के सृजन को प्रोत्साहित करने पर सदस्यों ने बल दिया और यह निर्णय किया गया कि प्रस्तावित कृतक बल एनआईडी द्वारा स्टायलिंग और डिजायनिंग कौशलो से पूर्ण मानवशक्ति के प्रशिक्षण के लिए दिये गये प्रस्तावो को देख सकता है और उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रशिक्षण सुविधाओ की स्थापना के लिए निधिकरण समर्थन के मुददे पर विचार कर सकता है ।
11. कार्यसूची मद सं.6: भारत का क्षेत्रीय व्यापार समझौतों और वरियता व्यापार समझौतो के तहत अन्य क्षेत्रों और देशों के साथ वचनबद्धता ।
इस विषय पर भी एसआईएएम द्वारा दिये प्रस्तुतिकरण में विस्तार से विचार विमर्श किया गया और यह निर्णय किया गया कि देश के बाजार डायनेमिक्स की उचित समझ विकसित करने के लिए केन्द्रित अध्ययन संचालन के लिए विशेष प्रस्तावों जिनके साथ क्षेत्रीय व्यापार समझौते/ मुक्त व्यापार समझौते पर विचार किया जाना है , का उपकर समिति द्वारा परीक्षण तथा निर्णयन किया जायेगा ।
12. कार्यसूची मद सं. 7 और 8: आटोमोबाइल क्षेत्र/भारत के डब्ल्यू पी 29 में शामिल होने से संबद्ध विषयों में नियमन के समन्वय के लिए संस्थानिक संरचना ।
श्री बलराज भानोत, निदेशक, एआरएआई, पुने ने भारत के डब्ल्यू पी 29 में पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होने के पश्चात स्तरों के समन्वय की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतिकरण दिया । उन्होंने परिषद को डब्ल्यूपी 29 के तहत दो समझौतो अर्थात 1958 समझौता और 1998 समझौता़ के भेदों और निहितार्थो के विषय में संक्षेप में समझाया । श्री भानोत ने अपने प्रस्तुतिकरण में भारत में ज्ञेएएसआईसी जैसी संस्थानिक संरचना,जैसा कि एसआईएएम द्वारा प्रस्तावित है, की आवश्यकता पर बल दिया । श्री भानोत ने यह संकेत भी दिया कि भारत को डब्ल्यू पी 29 वार्ताओं की प्रक्रिया में भाषण हेतु अब 1998 समझौते में शामिल होना उचित है और 1958 समझौते के निहितार्थों के अध्ययन हेतु एक समूह का गठन किया जाना चाहिये । सडक परिवहन और राजमार्ग विभाग (डीओआरटीएच) के प्रतिनिधि श्री एस.के.मिश्रा ने सूचित किया कि डीओआरटीएच स्वयं सडक सुरक्षा के लिये एक आयुक्त कार्यालय के गठन की प्रक्रिया में है और भारी उद्योग मंत्रालय एनेटीआरआईपी के तीत सुविधाएं गठित कर रहा है और किसी जेऐएसआईसी जैसी संस्था के गठन से पूर्व नई स्थापित की जाने वाली संस्थाओं की भूमिका को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाना आवश्यक होगा । अध्यक्ष ने समाप्त करते हुए कहा कि, जहां भारत के डब्ल्यू पी 29 के अधीन 1998 समझौते में शामिल होने पर सहमति है, अन्य मुददे जटिल बन गये हैं और प्रस्तावित कृतक बल को इन विषयों को भी देखना चाहिये ।
13. कार्यसूची मद सं. 9: राष्ट्रीय आटोमोटिव परीक्षण और आर एण्ड डी अव-संरचना परियोजना (एनएटीआरआईपी)
श्री सुनील चतुर्वेदी, परियोजना निदेशक,एनएटीआरआईपी, ने एनएटीआरआईपी की वर्तमान स्थिति और प्रगति पर एक संक्षिप्त प्रस्तुतिकरण दिया और कहा कि सीसीईए के अनुमोदन के पश्चात, परियोजना अगले कुछ सप्ताहों में आरंभ होने की संभावना है ।
श्री राहुल बजाज, एनएटीआरआईपी के लिय सरकारी प्रयासों की सराहना करते हुए, टिप्पणी की कि इस परियोजना के समय से कार्यान्वयन के लिए इस परियोजना का नियमित निधियन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है ।
14. प्रत्येक कार्यसूची विषय पर विचार विमर्श के बाद , विकास परिषद निम्नलिखित निर्णयों पर पहुंची :-
i. क्षेत्रीय व्यापार समझौतो/ वरियता व्यापार समझौतों पर भारत के दूसरे क्षेत्रों और दक्षिण अफ्रीका को शामिल करते हुए देशों के साथ वचनबद्धता पर विस्तृत अध्ययन संचालन के लिये एसआईएएम के प्रस्तावों, स्वच्छ हवा कार्यक्रम पर अध्ययन और वाहनों के पुनर्चक्रीकरण पर अध्ययन उपकर समिति द्वारा अपने आगामी अधिवेशन में विचार किये जायेंगे । इस प्रस्तावों की वित्त व्यवस्था आटो उद्योग के लिये इन प्रस्तावों के महत्व तथा निधि उपलब्धता पर निर्भर करेगी ।
ii. एसीएमए इस विषय पर अंतर-मंत्रालय विचार-विमर्श हेतु शुल्क/ कर संरचना और श्रम संबंधित विषयों में प्रस्तावित परिवर्तनों पर एक विस्तृत नोट पेश करेगा ।
iii. टीएमए इस विषय पर अंतरमंत्रालय विचार विमर्श हेतु ट्रैक्टर उद्योग की वृद्धि के लिये वित्त की तुरंत उपलब्धता को सम्मिलित करते मदगत कार्यबिंदू प्रस्तुत करेगा
iv. एसआईएएम, एसीएमए, टीएमए और भारी उद्योग विभाग के प्रतिनिधियों सहित एक कृतक बल अग्रिम कार्यवाही तथा विकास परिषद से निधि समर्थन/निम्नलिखित के लिये उपकर कोष स्वीकृत करने के लिये गठित किया जाएगा :-
(क) भारतीय आटोमोटिव क्षेत्र के एक वैश्विक केन्द्र में विकास के लिए 10 वर्षीय मिशन योजना का निर्माण ।
(ख) वाहनो की स्टायलिंग और डिजायनिंग तथा आटो कलपुर्जो के लिए उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मानवशक्ति के प्रशिक्षण हेतु सुविधाओं की स्थापना ।
(ग) भारत का डब्ल्यू पी 29 के तहत 1998/1956 समझौतो में सम्मिलन ।
(घ) स्तरों के समन्वय हेतु भारत में जेऐएसआईसी जैसे निकाय का गठन ।
अधिवेशन समाप्ति से पूर्व सदस्य सचिव ने सभी सदस्यों को उनकी भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया और अधिवेशन में लिये गये निर्णयों के त्वरित कार्यान्वयन हेतु सुझाव दिया कि उपकर समिति की अगली बैठक जुलाई के अंत तक नी चाहिये , प्रस्तावित कृतक बल की प्रथम बैठक अगस्त तक तथा विकास परिषद की आगामी बैठक सदस्यों की सुविधा का ध्यान रखते हुए दिसंबर, 2005 के प्रथम अर्द्धांश में होनी चाहिए ।
अधिवेशन अध्यक्ष को धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समाप्त हुआ ।