कृतक बल की उद्योग भवन, नई दिल्ली में सचिव (एचआई एण्ड पीई) की अध्यक्षता में हुए बैठक के विवरण

 

1.     कृतक बल की बैठक उद्योग भवन पर श्री प्रियदर्शी ठाकुर, सचिव (एचआई एण्ड पीई) की अध्यक्षता में भारतीय आटोमोटिव क्षेत्र के विकास के लिय 10 वर्षीय मिशन योजना के निर्माण हेतु 20 सितंबर, 2005 को हुई । बैठक में भाग लेने वालों की सूची संलग्न है ।

 

2.    विचार विमर्श प्रारंभ करते हुए, सचिव (एचआई एण्ड पीई) ने कहा कि बैठक आटोमोबाइल उद्योग की आशाओं को आकार देने रणनीति तथा कार्यवाही योजना विकसित करने तथा सरकार के भारत को 2015 तक एक वैश्विक केन्द्र के रूप में विकासित करने के इरादे से बुलाई गई है । उन्होनें यह भी संकेत किया कि यह बैठक उस बैठक श्रृखला की प्रथम बैठक है जिसका मंत्रालय ने बुलाये जाने का प्रस्ताव किया है ।

 

3.    सचिव ने उल्लेख किया कि हमें उद्योग के लिय एक कार्य योजना बनानी है और उद्योग से  भारतीय आटोमोटिव क्षेत्र को 2015 तक वैश्विक उत्पादन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के दृष्टिकोण को पूरा करने के लिये लक्ष्य रीति में क्रियान्वित क्रिये  जाने वाले विशेष  सिफारिशों और परियोजनाओं के साथ आगे आने का निवेदन किया । उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिस्पर्धात्मकता, तकनीक, निर्यात, अनु.और वि., मानवशक्ति के प्रशिक्षण आदि की दृष्टि से विशेष पैकेज  तैयार करना की आशा की जा सकती है । उन्होंने कहा कि कृतक बल को वांछित नीति परिवर्तनों, आवश्यक सुधारात्मक कदमोंऔर नये नीति उपक्रमों जो कि समस्याओं का पता लगाने के लिए आवश्यक हैं और वृद्धि में बाधा डाल रहे चिंताओं/बाधाओं के क्षेत्र को स्पष्ट रूप से पहचानना चाहिए । इस संबंध में , सचिव ने सुझाव दिया कि आटोमोबाइल उद्योग के चिंतन ाविषयों की प्रत्येक वृहद श्रेणी के लिय कार्य समूहों का गठन किया जाना चाहिए और कृतक बल की रिपोर्ट जनवरी, 2006 के मध्य तक तैयार होनी चाहिए, ताकि बजट से संबंधित कृतक बल सिफारिशों का बजट पूर्व गतिविधि में पता लगाया जाना चाहिये ।      

 

4.    डा. सुरजीत मित्रा, संयुक्त सचिव, एमओएचआई एण्ड पीई  ने कहा कि इरादा दूसरा नीति दस्तावेज प्रारूप तैयार करने का नहीं है किन्तू  सहमत दृष्टिकोण को एक वास्तविकता बनाने के लिये मिशन रीति में कार्यान्वित किये जाने वाले कार्यकलापों और परियोजनाओं की पहचान का उद्देश्य होना चाहिए । उन्होंने सुझाव दिया कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों और आटो उद्योग के विषयों के अनुसार आगामी 6 सप्ताहों में सिफारिशों और रोडमैप के साथ आगे आने के लिये  उप समूहों का गठन किया जाना चाहिये जिसके उपरांत सिफारिशों पर  सहमति बनाने के लिय अंतर मंत्रालय विचार विमर्श हो सकेगा । इसके उपरांत, एक रोडमैप और कायवाही बिन्दू को अंतिम रूप दिया जा सकेगा ।

 

5.    सचिव ने इसके बाद एसआईएएम, एसीएमए,एआरएआई, वीआरडीई, विज्ञान और तकनीक विभाग के प्रतिनिधियों और बैठक में भाग लेने वाले अन्य सहभागियों को विचार प्रकट करने हेतु आमंत्रित किया ।

 

6.    मि. रवि कांत,उपाध्यक्ष एसआईएएम, सचिव के सुझाव से सहमत थे कि कृतक बल सिफारिशें बजट पूर्व विचार विमर्श से पहले तैयार होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि दस्तावेज भारत सरकार की आटो नीति के दृष्टिकोण को आगे ले जाने के लिए अति संक्षिप्त होना चाहिए । उन्होने सुझाव दिया कि इस मिशन दस्तावेज का उद्देश्य कार्यवाही बिन्दुओं को अनुमोदित करना है जो उद्योग को अपना टर्नओवर 2010 तक दुगुना करने में तथा 2015 तक 100 अरब अमेरिकन डालर के टर्नओवर तक पहुचने के क्रम में वृद्धि दर बनाये रखनेमें मदद करेगा जिसके लिये घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय- दौनों तरह की मांग का सृजन आवश्यक होगा । मि. रवि कांत ने कहा कि दस्तावेज में सरकार और उद्योग दोनों की भुमिका और जिम्मेदारियों के साथ स्पष्ट रोड मैप होना चाहिये और उसमें उद्योग द्वारा तथा सरकार द्वारा  प्राप्त किये जाने वाले लक्ष्य होने चाहिये । उन्होंने सुझाव दिया कि 2015 तक 65 अरब अमेरिकन डालर की घरेलू मांग तथा 35 अरब अमेरिकन डालर की निर्यात मांग के सृजन के लिये और भारतीय आटोमोटिव उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिये केवल 3-4 समितियां होनी चाहिये ।

 

7.    अध्यक्ष, एसीएमए एसआईएएम के सुझावों से सहमत थे और उन्होंने कहा कि उन्होंने मैकिन्से द्वारा किया गया एक अध्ययन पढा है जो कहता है कि कलपुर्जा उद्योग का निर्यातका चालू अनुपात ( टर्नओवर का 16%) के 2015 तक घरेलू टर्नओवर के  120% तक बढ जाने की आशा है । उन्होंने सुझाव दिया कि समिति को चीन और थाईलैण्ड की ओर अति गहनता से देखना चाहिये और समझना चाहिये कि वे आंतरिक रूप से कैसे वृद्धि कर रहे हैं और अगर आवश्यक हो तो उनके साथ बैंचमार्क करना चाहिये जहां उन्होंने उत्कृष्टता दिखाई है ।

 

8.    मि. टी.सी.गोपालन, टीएमए की ओर से ने कहा कि ट्रैक्टरों का चालू निर्यात इसके टर्नओवर के 10% के लगभग है और यह आशा की जाती है कि यह अनुपात 2015 तक टर्नओवर का 40% हो जायेगा ।

 

9.    निदेशक, एआरएआई ने सुझाव दिया कि एनएटीआरआईपी के तहत आने वाली परीक्षण सुविधाएं इस विशाल निवेश से लाभ प्राप्त करने के लिये डिजायन तथा अन्य अनुसंधान उद्देश्यों के लिये उपयोग किया जाना चाहिये ।

 

10.   मि. बिजोन नाग, कृतक बल के सदस्य रवि कांत के सुझावों से सहमत थे और उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज को प्रशिक्षण, मानव शक्ति विकास तथा अनु.और वि.पर भी ध्यान देना चाहिए ।

 

11.    निदेशक, एमओआरटी एण्ड एच  से सुझाव दिया कि अगर उद्योग महत्वपूर्ण रूप से वृद्धि करता है ,तब हमें नकारात्मक नतीजों को भी देखना चाहिये ताकि निस्सरण और सुरक्षा के रूप में पूर्व सावचेती उपाय उठाये जा सकें ।

 

12.   बैठक में विविध सहभागियों द्वारा व्यक्त किये गये विचारों  को ध्यान में रखते हुए, 5 कार्य समूहों के गठन का निश्चय किया गया । कार्य समूहों के विस्तृत क्षेत्र और इन कार्य समूहों के संदर्भ में अध्यक्ष नीचे दिये अनुसार निर्णित किये गये :-

क्र.स.

कार्य समूह का नाम

अध्यक्ष

1.

मांग सृजन,  ब्राण्ड निर्माण तथा अवसंरचना

श्री रवि कांत

उपाध्यक्ष, एसआईएएम

2.

निर्यात तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय

श्री दीप कथुरिया

पूर्व अध्यक्ष, एसीएमए

3.

प्रतिस्पर्धी निर्माण स्तर तथा तकनीक

डा. पवन गोयनका

सीओओ, महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा लि.

4.

पर्यावरण तथा सुरक्षा

श्री जगदीश खट्टर

अध्यक्ष, एआरएआई

5.

मानव संसाधन विकास

डा. सुरिन्दर कपूर

सीएमडी, सोना कोयो स्टीयरिंग सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड

 

13.   यह भी निश्चित किया गया कि कार्य समूहों के अध्यक्ष कृतक बल के विशेष आमंत्रित के रूप में सहयोजित भी किये जा सकेंगे और वे अपने संबंधित क्षेत्रों के लिये कार्य समूहों का गठन कर सकेंगे अगर वे आवश्यक समझें और 5 सप्ताह में ( जैसे 31-10-2005 तक)  अपने समूह के लिये प्रथम रिपोर्ट पेश कर सकेगे ताकि समान विषय कृतक बल द्वारा आगे विचार किया जा सके ।

 

14.   बैठक अध्यक्ष को धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समाप्त हो गयी ।