उपकर समिति की को उद्योग भवन, नई दिल्ली में सचिव (एचआई एण्ड पीई) की अध्यक्षता में 20 सितम्बर, 2005 हुई छठी बैठक का विवरण

 

1.     उपकर समिति की छठी बैठक उद्योग भवन, नई दिल्ली पर सचिव (एचआई एण्ड पीई) की अध्यक्षता में 20 सितम्बर,2005 को हुई ।

 

2.    आर एण्ड डी परियोजनाओं का विस्तृत विवरण देते हुए जो कि उपकर समिति के क्षेत्र में आते हैं,सचिव (एचआई एण्ड पीई) ने विभिन्न स्वीकृत परियोजनाओं के संबंधमें प्रक्रिया और उपयोगिता की रिपोर्ट करने में अनुशासन की आवश्यकता को रेखांकित किया । उन्होंने आगे कहा कि एफआरबीएम अधिनियम त्रैमासिक अनुवीक्षण पर बल देता है और कोष जारी करने पर प्रतिबंध लगाता है जब तक कि निर्धारित अवधि में उपयोगिता प्रमाणपत्र न पेश कर दिये जाएं । सचिव ने निर्देश दिया कि सभी कार्यान्वयन अभिकरणों को उपयोगिता प्रमाण पत्र जो कि कि देय हैं,को शीघ्रता से भेजना चाहिये और सुनिश्चित करना चाहिये कि प्रगति रिपोर्ट सभी विवरणों सहित निर्धारित प्रपत्र में समय से भेजी जाएं। उन्होंने आगे कहा कि कोष का उपयोग न करना विपरीत दृष्टि से देखा जायेगा ।

 

3.    संयुक्त सचिव ने कार्यसूची मदों का परिचय दिया । उन्होंने कहा कि उपकर समिति अब तक 124 परियोजनाएं स्वीकृत कर चुकी है, जिनमें से 81 पूरी हो चुकी है और 43 चल रही हैं । उन्होंने उल्लेख किया कि उपकर कोष उपलब्धता आने वाले वर्षो में घटेगी क्योंकि उपकर का एक बडा भाग एनएटीआरआईपी परियोजना के कार्यान्वयन हेतु उपयोग होगा ।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में कोई कोष जारी नहीं किया जाएगा जब तक कि संबंधित कार्यान्यवन अभिकरणों द्वारा  बाकी रहे उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेजे जाते । उन्होंने कहा कि प्रस्तावों के विस्तृत परीक्षण के क्रम में, एक चयन समिति बना दी गई है जो उपकर समिति द्वारा विचार हेतु उपयुक्त प्रस्तावों की लघु सूची बनाती है । पिछली चयन समिति द्वारा लघुसूची को अंतिम रूप देने हेतु उपयोग किये गये चयन बिन्दू जारी योजनाओं का निधियन और उन नयी परियोजनाओं का विचार करना है,जो एनएटीआरआईपी के आदेश की नकल नहीं करते । तदनुसार, केवल 9 परियोजनाएं अनुमोदित की गई हैं ।

 

4.    वित्त मंत्रालय से सख्त निर्देशों ाऔर उपकर कोष की सीमित उपलब्धता के दृष्टिकोण से, संयुक्त सचिव ने जोर दिया कि कार्यसूची नोट के परिशिष्ट में उल्लेखित 11 बकाया उपयोगिता प्रमाणपत्र सीएजी की रिपोर्ट में दर्शाये गये है और मंत्रालय के भुगतान तथा खाता अनुभाग  द्वारा भी स्वीक़त नहीं की गई है । डा. मित्रा ने कहा कि अगर उपयोगिता प्रमाण पत्र 12 माह के निर्धारित समय में प्राप्त नहीं होते हैं तो मामला मंत्रालय द्वारा गंभीर रूप से लिया जाएगा और चाहते हैं कि निर्धारित पुनरीक्षित प्रप्त में उपयोगिता प्रमाणपत्र संबंधित संस्थानो द्वारा एक माह में भेज दिये जाएं , अन्यथा  इन संस्थानों को आगे कोई कोष जारी नहीं किया जायेगा ।

 

5.    निर्मित प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए,  संयुक्त सचिव  ने परियोजनाओं का कार्यायन कररहे संस्थानों द्वारा तिमाही प्रगति रिपोर्ट (क्यूपीआर) न प्रस्तुत किये जाने पर असंतोष व्यक्त किया । उन्होंने कहा कि केवल एआरएआई ने पिछली क्यूपीआर पेश की है लेकित एआरएआई द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में परियोजना कार्यान्वयन की विशेष सूचनाओं की कमी है । उन्होंने कहा कि परियोजना के कार्यकारी अभिकरण को कयूपीआर में अस्पष्ट शब्दों के प्रयोग से बाज आना चाहिये और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अर्जित प्रगति के उचिप परिमाणन होना चाहिये । उन्होंने आगे कहा कि बहुत सी स्वीकृतियां संस्थाओं के पास निष्क्रिय रखी है और कुछ संस्थान ब्याज कमा रहे हैं जो कि एक स्वस्थ प्रक्रिया नहीं है और इसकी आज्ञा नहीं दी जा सकती है । उन्होने यह भी संकेत दिया कि उपकर कोष से स्वीकृत सभी परियोजनाएं समयबद्ध हैं  और संस्थानों को कठोरता से समय सीमा का पालन करना चाहिये । उन्होंने बहुत सी स्वीकृत योजनाओं  के संबंध में अधिक समय लगने पर मंत्रालय का असंतोष प्रकट किया ।

 

6.    इसके पश्चात, एआरएआई, वीआरडीई, एफसीआरआई, टीआईएफएसी, एसआईएएम,सीआईआरटी और टीएमए से प्राप्त नये परियोजना प्रस्तावों को विचार विमर्श हेतु लिया गया । ये परियोजनाएं संयुक्त सचिव द्वारा संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक में चयन की गई और 6 परियोजनाएं उपकर समिति के विचार के लिय लघु सूचीबद्ध की गई । ये परियोजनाएं एक एक कर विचार की गई और प्रत्येक परियोजना के सबंध में निर्णय लिये गये जो नीचे दिये गये हैं :-

 

एआरएआई की परियोजना

 1.  विद्युत वाहन तथा उसके एआईएस के अनुसार उप तंत्रों 38, 39, 40,41, 48, और 39 के लिये 100 लाख रूपये की लागत पर प्रमाणपत्र परीक्षण सुविधा

उपकर समिति ने परियोजना को मंजूरी दी । यह, यद्यपि, टिप्पणी की गई कि परियोजना एक साल में पूरी हो जानी चाहिये ।

2.    400 लाख रूपये की कुल लागत पर एआरएआई, पुणे की परियोजना अर्थात निस्सरण उपकरणों के पुनर्स्थापन के शेष भागों की लागत को मंजूरी के निवेदन पर विचार विमर्श और इस परियोजना की 200 लाख रूपये की शेष राशि जारी करना ।

उपकर समिति इस परियोजना की शेष 200 लाख रूपये की राशि जारी करने को सहमत हुई किन्तु अतिरिक्त सीमा शुल्क देयताओं को पुरा करने हेतु एआरएआई के निवेदन से सहमत नहीं हुई और कहा कि एआरएआई को इसे अपने स्वयं के स्रोतो ंसे पूरा करना चाहिये ।

वीआरडीई की परियोजना

     3.    125 करोड रूपये की लागत से फोटोमैट्री प्रयोगशाला ( चयन ׀׀ ) का मूल्यवर्धन

यह ध्यान में रखते हुए कि यह परियोजना का नवीनतम स्तर प्राप्ति का उद्देश्य है ,उपकर समिति द्वारा अनुमोदित की गई ।

एफसीआरआई की परियोजना

      4.    300 लाख रूपये की लागत से सीएनजी फिल सिस्टम और इसके कलपुर्जो के फ्लो परीक्षण के लिये परीक्षण सुविधा

आटोमोटिव ईधन के रूप में सीएनजी के बढते उपयोग, सीएनजी वितरण स्टेशनों के लिये परीक्षण की बढती आवश्यकताओं और परियोजना की अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, यह उपकर समिति द्वारा स्वीकृत की गई ।

टीआईएफएसी की परियोजना

     5.    चेन्नई में कोयम्बटूर बस टर्मिनस पर वाहन ट्रेंकिंग और नियंत्रण तंत्र ।

यह टिप्पणी की गई कि परियोजना का सहभागिता विकास तथा टेलेमैटिक्स स्तर जो कि यातायात क्षेत्र में टेलेमेटिक्स  के विस्तृत प्रयोय के लिये उपयोगी होंगे, के विकास का उद्देश्य है । क्योंकि यह परियोजना अनुमोदित की गई थी और टीआईएफएसी द्वारा कार्यान्वित की जजायेगी और टेलेमेटिक्स आटोमोटिव क्षेत्र के विकास के लिये संभाव्यता प्रदान करने वाला एक उभरता क्षेत्र है, उपकर समिति यह परियोजना स्वीक़ृत करती है ।

 

एसआईएएम से परियोजना

     6.    आटोमोबाइल रिसायकलिंग पर अध्ययन

यह परियोजना स्वीकृत की गई और यह सहमति हुई कि कुल लागत में से 15.50 लाख रूपये उपकर कोष के बाहर से उपलब्ध कराये जायेंगे ।

सीआईआरटी से परियोजनाएं

     7.    गतिज स्थिति में टायरों की अत्यधिक वृद्धि के गणन के लिये परीक्षण सुविधाओं की स्थापना ।

     8.    एसएई ो 1060 और जेएएससीओ सी -606  के अनुसार टायर शोर मापन तंत्र की स्थापना ।

     9.    ट्रक और बस के रेडिकल टायरों के लिय इनकी एआईएस-044  (भाग 1)के अनुसार नॉन यूनिफॉर्मिटी के मापन हेतु टायर यूनिफॉर्मिटी परीक्षण केन्द्र की स्थापना ।

     क्योंकि चयन समिति की बैठक में सीआईआरटी का कोई प्रतिनिधि नहीं था, यह निश्चित किया गया कि ये परियोजनाएं उपकर समिति के इन पर विचार किये जाने से पूर्व चयन समिति द्वारा विचार किया जाये ।

8.    एसआईएएम ने संकेत किया कि आईसीएपी परियोजना पर एसआईएएम द्वारा एक प्रस्ताव पेश किया जा चुका है, जो पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा समन्वित किया जा चुका है, उपकर समिति को इसे वित्त प्रदान करना चाहिये । अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि इस परियोजना को अगली उपकर समिति बैठक में प्रस्तुत किये जाने से पूर्व चयन समिति द्वारा विचार किया जाना चाहिये ।

9.    कोई अन्य कार्यसूची मद न होने के कारण, बैठक अध्यक्ष को धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समाप्त हो गयी ।